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Thursday, May 28, 2020

Rang Biranga Insan..!!

इत्तेफाक से इत्तेफाक नहीं होते, चमत्कार चमत्कार से नहीं होते, सब माया है हाँ, यह सत्य है या यह समझलेना की सब माया ही है, खुद में एक माया में खो जाने जैसा है। उम्मीद का भी तमाशा कम नहीं है, जानवरो से होती नहीं है फिर इतने मनुष्य रूपी जानवर जो खुले घूम रहे हैं इन से उम्मीद क्यों..? खुद से क्यों नहीं..?
क्रोध का जोर इंसान पर जब चलता है तब बस एक ही सत्य होता है कि वो इंसान जो चाहता, सोचता, समझता, जानता या कहना चाहता है वही एक परम सत्य है बाकी सब झूठ और कल्पना है। क्रोध तो अभीषाप जैसा है ज़िसमे सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है या फिर कह दूँ के उन लम्हो में वो इंसान खत्म हो जाता है, जिसको क्रोध आया है।
बात करूँ सपनो की या फिर अपनो की, ये दोनो भी विचित्र प्राणी है, जिसके जीवन मे दोनो होते है वो या तो सब कुछ बन जाते है या फिर खाक हो जाते है। सपने देखना भी सोच का एक खूबसूरत नज़रिया है, जिस में अच्छा इंसान वो है जो अपने सपनो के लिए लड़ना भी जानता है और मझधार में खड़े हो कर अपनी बात को कहना भी लेकिन जो ऐसा नहीं कर सकते या फिर उम्मीद करते है कि कुछ दिन, महीनो, साल बाद सब ठीक कर लूँगा वो मुझे इतना बता दें कि तुमको भविष्य का पता कैसे चल गया, ऊपर वाले ने नीचे आकर बताया य़ा आपको ब्लू डार्ट से ऊपर बुलाया था। जिनको अगले पल का पता नही वही सबसे पहले कल खूबसूरत होने की बात करते है, ऐसे लोगो के आगे कबीर, रहीम व तुलसी भी नतमस्तक है। 
फिर आते है अपने जो सिर्फ खून के रिश्तों से ही परिभाषित नही होते, ये तो मुझे आजकल की दुनिया में बड़े ही मजेदार किरदारो की तरह दिखाई पड़ते है। सबका अपना अपना क़िस्सा व प्रसंग है, यह सब मज़हब, रंग रूप, भाषा और वेश-भूषा जैसे ही लगते है अपनी अपनी वजह के अनुसार यह लोग अलग तरह से अपने होते है, कोई वक़्त देख के अपना है तो कोई अपना फायदा देख कर, कोई माहोल और ज़रूरत महसूस कर करीब आता तो कोई रिश्ता निभाते निभाते ब्लॉक कर के गायब ही हो जाता है, और कुछ तो अव्वल नम्बर होते है, ये मेरे मुँह पे मेरे, तेरे मुँह पे तेरे वाले। एहसासो की कद्र करो, दिल तो बिल्कुल मत दुखाओ, हाँ वक़्त बड़ा बेबस हो जाता है कभी कभी लेकिन एक रास्ता हमेशा खुला रहता है जीवन में निरंतर अग्रसर रहने के लिये। रिश्तों में धर्मसंकट तो महादेव शिव और माता सती के दौर से चलते आये है, त्रेता युग में राम सीता हो या फिर द्वापर में राधा कृष्ण, प्रेम हो विवशता हो या फिर मर्यादा और आदर्श, जब भगवान इस से नही बचे तो इंसान की क्या औकात भला। दोस्ती प्यार और वो नये ज़माने का नया रिश्ता कि इस रिश्ते को क्या नाम दूँ..? ये भी अच्छा मजाक करते है लेकिन हाँ, कुछ महान बन भी जाते है और कुछ बन भी सकते है पर इस दौर में क्या वक़्त की कसौटी  पर खड़े रह कर जीत पाने की ताक़त हर किसी में है..? यही तो जीवन है, जोखिम अपना है और तकलीफ भी पर अगर आप भी एक नम्बर ज़िद्दी हो तो सफलता भी आपकी ही तो है। 
चिंता और चिंतन में अंतर समझो नहीं तो आपकी चिंता आपको चिता बनाने को तत्पर है। 
वो मनुष्य मुझे समझ नहीं आते जो बेहद प्रतिभावान है परंतु उनसे बड़ी मुर्खता भी कोई नही करता। कुछ तो दिमाग का इस्तेमाल इतना करते है कि आइंस्टाइन को भी पीछे करके मानेंगे लेकिन कुछ इतना भी नहीं करते कि दिमाग खुद कह दे, अरे भाई हम भी वजूद में हैं, ज़रा हमको भी इस्तेमाल कर लिया करो। एक बात आम का पेड़ सिखाता है या सारे फल देने वाले पेड़ का उदाहरण ले लीजिये आप, कि जब खेत में खुदाइ करने से लेकर सारी मेहनत कर पेड़ बड़ा होने तक एक किसान निरंतर इसी उम्मीद में जीता मरता है कि अच्छे दिन तब आयेंगे जब इस पेड़ पर फल आयेंगे, फिर खूब पैसा मिलेगा और काम भी मिलेगा, बीच का वक्त लम्बा भी होता है और कठिन भी, कभी कभी सब साथ भी छोड देते है लेकिन फल आते ही कुछ चिंदी चौर ऐसे आते है जैसे ये वाला फल मेरा वो वाला तेरा, तुम्हारा बाप आया था मेहनत करने य़ा दादा..? साथ कंधे से कंधा मिलाकर चला तक तो जाता नही, और बात आप करते हो उसूलो की.. उफ़ तुम्हारे ये उसूल..!!
चुप रहो य़ा लडना सीख लो, बीच मे टंगे मत रहो वरना शुक्र मनाओ अर्जुन कर्ण एकलव्य जैसे निशानेबाज अब नहीं, वरना सबसे पहले आप जैसे इंसानो को तीतर की तरह उडा दिया जाता।
वक़्त बदल गया है, थोड़ा सा बदल लो खुद को, सब जानते हुए भी भटको मत, उलझने मिटा दो क्योंकि अब उधेडबुन में लगे इंसान भी उधेड के वापस बुन दिये जाते है, सोच को बदलो या फिर यह ग्रह बदलो, बस कीडे मत बनो, रेंगते मत रहो। विचारो को लिखना व्यक्त करना बहुत आसान है पर ऊन्हे खुद पर लागु करना य़ा उनसे व्यक्त करना जिन से भय है, बहुत मुश्किल कार्य है पर अगर यह कर लिया तो कम से कम कुछ वक़्त ज़िन्दा मनुष्य की तरह जी तो सकते हो वरना भागते रहो भौजन की तलाश और दूसरो की सोच का बोझ उठाने में क्योंकि फिर आप खुद किसी काबिल बचे ही नहीं हो। किस्मत, उम्मीद, रिश्ते, एहसास, सपने, अपने, सोच और जीवन का एक ही परस्पर नाम है और वो हो आप, या फिर खुद को जानवरो की श्रेणी में रख लेते हैं, नही उन से भी नीचे, या सबसे नीचे बेहतर है।
मेहनत करो, क़ीमती इतना बनो, कि दुनिया का अमीर से अमीर भी आपकी सोच को खरीद ना सके। खुद की सोच को समन्दर बनाओ और स्वयँ को उसका राजा, आप कौन हो क्यूँ हो और कहाँ हो, एक बार स्वयँ विचार करो और जब लगे की जहाँ हो गलत हो, जो हो गलत हो, जैसे हो गलत हो, तो बस आज का ही वक़्त है, तय करो और बदल जाओ क्योंकि कल तो है ही नही, वरना ना ये वक़्त रुकेगा और ना कोई और, क्योंकि अधूरा जो कुछ भी है, वो आप और मेरे जैसे ही मनुष्य है।
कामयाबी आसान होती ही कहाँ है, लेकीन जो आज इतने कामयाब है, कुछ तो अलग हैं वह हम से। जीने के लिये दो वक़्त की रोटी तो कोई भी कमा लेता है, पर जो उपहार उपर वाले ने जीवन नाम का दिया है, जब तक पृथ्वी पर हो उसे खूबसूरत बनाओ, कोशिश तो करो, इतना तो खुद से मरते वक़्त कह सको कि जो किया, जी जान से किया, नजरें तो मत चुराओ। मेंने भी कोई झंडे नही गाड़े पर यकीन मानो मेरा, मुझे नीन्द बड़ी सुकून की आती है।
इसलिय जो जहाँ, जैसा है वैसा रहने दीजिये, बस खुद को एक बार जोर से हिला कर पूछ लेना...
जिन्दा हो ना..?

- Salil Singh 
Original Written: 15-10-2018
Edited Written: 27-05-2020

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