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Thursday, April 23, 2020

जब एक करीबी को गले से लगाया था..

यह लेख मैने, सितम्बर 2018 में लिखा था।

आज एक करीबी को गले से लग के रोते देखा तो एक पल को लगा कि बस, अभी जीत लूं दुनिया और अपने हर करीबी के नाम कर दूँ, क्योंकि मुझे दुनिया मे नहीं, उनके जज़्बातो में ज़िन्दा रहना है।

वक़्त के साथ मैं खुद क्या बन गया हूँ, मैं ही नही जानता बस जज़्बातो का सिलसिला ज़ारी रहना चाहिए नहीं तो इंसान इंसान नही बल्कि जानवर से भी निचली कतार मे शामिल हो जायेगा, क्योंकि आज तो जानवर भी जज़्बातो को ब्यान करना जानते है।

तकलीफो का सफर ज़ारी रहता है, बस दो पल हँस के जीना ही ज़िन्दगी है। मैने कविता लिखना छोड दिया कुछ महीने या साल, वजह बस यूँही, पर हालात लिखता रहता हूँ। आज कल एक नया ही अध्याय शुरू हुआ है ज़िन्दगी में। कुछ मिल जाते है जो अपने होने का पहले यकीन दिलाते है, फिर अपने बन जाते है और फिर बहुत सारी तकलीफ दे कर गायब हो जाते है जैसे कभी आये ही नही थे, इस प्रकार के लोग पहले से ही मिलते रहते थे पर अब सहसा आदत मेें आ गये है पर कुछ ऐसे भी है जो बहुत अच्छे हैं हमेशा ही अच्छा व्यवहार करते है लेकिन बात जब साथ खडे होने की आती है तो कभी भी एक तरफ नही चुनते, उन्हे गलत से भी ताल्लुक रखना है और सही से भी, अद्भूत होते है ऐसे लोग, मुस्कुरा के सारी उलझनो से बाहर निकालने का रास्ता दिखाके खुद कभी हाथ नही पकडते। कुछ इतने प्यारे मिल जाते है जैसे उनको देख के बस दिल कहता कि ये तो अपना है, और उनको वक़्त के साथ जीवन के आने वाले लम्हो मे शामिल कर लेते है हम, बस बहुत चुनिन्दा ही होते है ये लोग, पर क्या वो वैसे ही होते है, जैसा हम मान कर चल रहे होते है..? विचार करने योग्य बात है यह, है ना...?

अभी काफी कुछ बदल गया है, पर हमने कभी हारना सीखा ही नहीं, चलो इस बार शब्द कम है और एहसास ज्यादा इसलिये खामोशी बेहतर है। वक़्त की रफ्तार बहुत तेेज़ हो चुकी है, इसलिये अब बदलाव भी बेहद ज़रूरी है।

पिछ्ले कुछ वर्षो को देखूं तो इस वर्ष मैने काफी कुछ हासिल किया है और अभी तो बस शुरूआत है लेकिन अब जरूरी है यह कि यही समय है, युद्ध करने का, जीवन के रण में। कुछ महारथी अब मेरे साथ भी है, कल वक़्त बदल सकता है, खुद के सामर्थ्य पर भरोसा है, पर अकेले लड़ने का अब मन नही है, जब तक भरोसा है, एक साथ लडेंगे। विजय से पूर्व रुकने का विचार नही है, बिल्कुल भी नही।

इन कुछ खुशियों के साथ इस बार और भी एक बात जानी मैने, और वो है एक ऐसी सीख जो सारी ज़िन्दगी मुझे याद रहेगी, फिर चाहे वो दोस्ती के लिए हो या प्रेम के लिये या स्वप्नो के लिये। अपनो के लिए हो या अन्जानो के लिए, वादो के लिए हो या मतलब के लिए, अब भीड का हिस्सा तो मैं बिल्कुल नहीं हूँ, था तो पहले भी नही पर अब अनुभव और उम्र ने जो सिखाया, उस आधार पर कहता हूँ, तो लाख बात की एक बात, सब को बस कुछ अपने चाहिए होते है, जो गुरु हो, मित्र हो या फिर साथी अन्तिम वक़्त तक पास रह जायें। अब ये रिश्ते टूटने नही चाहिये, मैं पूरी कोशिश करूंगा, और अगर मैं जो दूर हुआ, तो फिर वो मेरी आखिरी कोशिश के बाद का प्रयत्न होगा, आखिरी प्रयत्न।

चलो, तब तक अन्त का सफर जारी रहेगा, उम्मीदों का, कामयाबी का और नाकामी का, सुख और दुख का, आसुँ और मुस्कराहट का, बहुत से अपने पहले भी लगते थे और आज भी लगते है, पर अपना कौन है यह तो वक़्त ही बतायेगा ना...? जिंदगी में कचरा बहुत भर गया है, अब सफाई शुरू करनी होगी, चलो अब रुकते है, यह सबसे उपयुक्त समय है।

खेर अभी इतना ही दिमाग लिखने की इजाजत दे रहा है वर्ना मेरा फाइनल ड्राफ्ट बुरा मान जायेगा कि इतने में कहानी ही लिख ले, क्योंं ज्ञ्यान दे रहा है, वैसे आपके पास अवसर है, पढ़ भी सकते है या ये बस स्क्रोल करें, और खत्म करें।

-सलिल सिंह
18/09/2018

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